भीड़ से डरता है तन्हाई में घबराता है दिल......

भीड़ से डरता है तन्हाई में घबराता है दिल,
आजकल तो खुद से भी मिलने से कतराता है दिल.

अपने जिस्म का है बस टूटी हवेली सा वजूद,
आईने में झांकते ही खुद से घबराता है दिल.

इस जमाने ने सिवाए तोहमतों के क्या दिया,
दरअसल अब तो मुहब्बत करके पछताता है दिल.

इस कदर कुछ हादसों ने तोड़ डाला है कि अब,
बेसबब हर बात पर बस यूँ ही भर आता है दिल.

एक जमाना हो गया अब तो उन्हें देखे हुए,
हर घड़ी हर पल उन्हें मिलने को ललचाता है दिल.

सब्र कर ! थी वक्त की साजिश जो सब कुछ लुट गया,
मुझको तन्हा देखकर अक्सर ये समझाता है दिल.

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